- निद्रा ही जीवन का आधार है।
- निद्रा ही जीवन का अन्तिम सत्य है। अर्थात व्यक्ति निद्रा में ही जन्म लेता है और अन्ततोगत्वा चिर निद्रा को प्राप्त हो जाता है।
- इस देश की अधिकांश आबादी इसी अवस्था में ही रहती है ।
- निद्रा में ही व्यक्ति स्वप्न देखता है और उन्हें पूर्ण करने का प्रयत्न भी करता है। अर्थात समस्त इच्छाये निद्रा में ही उत्पन्न होती है तथा निद्रा में ही पूर्ण होती है।
- निद्रा में ही परम सत्य का ज्ञान होता है।
- प्राणी को अधिकाधिक जितना हो सके इस निद्रा लेनी ही चाहिए ।
- निद्रा में ज्ञान ,अर्थ ,मोक्ष, धन ,कष्ट निवारण आदि सभी उपलब्धिया सरलता से उपलब्ध होती है।
द्बारा : निद्रा सम्प्रदाय प्रवर्तक बाबा अखंड निद्राधारी कुम्भ कर्णेश्वर महाराज
नोट - निद्रा सम्प्रदाय ग्रहण करने के लिए शांतचित होकर एक झपकी ले तथा निद्रा सप्तक का वाचन करे
मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं
ReplyDeleteआशा है आपकी शान्ति आपको मिल जायेगी और आप उसके साथ निद्रा के आगोश में सुखानुभूति करेंगे.
शुभ कामनाओ के साथ
ReplyDeletenidra me hi naukri bhee karte hain sabhi. lekin papa ko kaun samjhae ki apni ko dhyan karo. khair jisne samajh liya uska bera par hai. papa ko doobne do. nidra sampradaya ke sabhee sadasyon ko shubhkaamnayen. dhanyabad evam shubh din. jay nidra devi.
ReplyDeletesundar
ReplyDeleteBhai emotional ho rha h
ReplyDelete