Thursday, March 26, 2009

जिंदगी : एक नज़र






तू ही दोस्त मेरी तू ही दुश्मन मेरी ,
हर रिश्ते में , मैं तुझे देखता हूँ ॥



तू रास्ता तू मंजिल ,तू हकीकत ख्वाब तू ।

तुझे ही बस शामो -सहर देखता हूँ ॥



तू आसमां जमीं भी तू है ,तू दरिया साहिल भी तू है ।

सबको है तेरी नज़र , हासिल देखता हूँ ॥



तू हिंदू तू मुसलमां,अँधेरा शब का है तू जलती शमा।

रोशनी तेरी गीता -ओ - कुरान में देखता हूँ ॥



"आफ़ताब" तुझसे जुदा नहीं ऐ शाहिदे-जिंदगी ।

मौत में भी तेरा ही , असर देखता हूँ



Saturday, March 7, 2009

निद्रा सप्तक

निद्रा सम्प्रदाय के अनुयायी निम्न सात सिद्धांतो का पालन करते है जिन्हें निद्रा सप्तक के नामसे जाना जाता है


  1. निद्रा ही जीवन का आधार है।

  2. निद्रा ही जीवन का अन्तिम सत्य है। अर्थात व्यक्ति निद्रा में ही जन्म लेता है और अन्ततोगत्वा चिर निद्रा को प्राप्त हो जाता है।

  3. इस देश की अधिकांश आबादी इसी अवस्था में ही रहती है ।

  4. निद्रा में ही व्यक्ति स्वप्न देखता है और उन्हें पूर्ण करने का प्रयत्न भी करता है। अर्थात समस्त इच्छाये निद्रा में ही उत्पन्न होती है तथा निद्रा में ही पूर्ण होती है।

  5. निद्रा में ही परम सत्य का ज्ञान होता है।

  6. प्राणी को अधिकाधिक जितना हो सके इस निद्रा लेनी ही चाहिए ।

  7. निद्रा में ज्ञान ,अर्थ ,मोक्ष, धन ,कष्ट निवारण आदि सभी उपलब्धिया सरलता से उपलब्ध होती है।

द्बारा : निद्रा सम्प्रदाय प्रवर्तक बाबा अखंड निद्राधारी कुम्भ कर्णेश्वर महाराज


नोट - निद्रा सम्प्रदाय ग्रहण करने के लिए शांतचित होकर एक झपकी ले तथा निद्रा सप्तक का वाचन करे



Wednesday, March 4, 2009

कालेज से कविताओं में रुचि बढ़ी , कुछ कविताए प्रकाशित भी हुई | रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है | मन के कुछ भाव शब्दों में बांधने का प्रयास करता हूँ |