तू ही दोस्त मेरी तू ही दुश्मन मेरी ,
हर रिश्ते में , मैं तुझे देखता हूँ ॥
तू रास्ता तू मंजिल ,तू हकीकत ख्वाब तू ।

तुझे ही बस शामो -सहर देखता हूँ ॥
तू आसमां जमीं भी तू है ,तू दरिया साहिल भी तू है ।
सबको है तेरी नज़र , हासिल देखता हूँ ॥
तू हिंदू तू मुसलमां,अँधेरा शब का है तू जलती शमा।
रोशनी तेरी गीता -ओ - कुरान में देखता हूँ ॥
"आफ़ताब" तुझसे जुदा नहीं ऐ शाहिदे-जिंदगी ।
मौत में भी तेरा ही , असर देखता हूँ ॥